वाराणसी के लोहता गांव के युवा कवि की एक रचना

🌸आज का बनारस🌸

मेरा बनारस विकास कर रहा है
नशा में एकदम टॉप कर रहा है
सभी हदों को पार कर रहा है
मुझे लगता है अपने पूर्वजों का अपमान कर रहा है
मेरा बनारस विकास कर रहा है l

आपस में लोग बात कर रहे थे
हमें लगा अपने बनारस का गुणगान कर रहे थे
लेकिन वह कुछ और कह रहे थे
बनारस में रस ढूंढ रहे थे
लेकिन मिला तो केवल नशा, शराब, धूआ और गाली
मेरा बनारस विकास कर रहा है l

देख कर यह सब माया
मेरा मन व्यथित हो रहा है
कैसे लोग अपनी संस्कृति को खो रहे हैं
नशा से नाता जोड़ रहे हैं
अपनों का साथ छोड़ रहे हैं
वृद्धा आश्रम खोल रहे हैं
मेरा बनारस सच में विकास कर रहा हैl

मां गंगा को वह प्यार व सम्मान कहां
तुलसी और बिस्मिल्लाह जैसा प्यार कहां
अब तो केवल बोतल, प्लास्टिक, गंदा है
पूरा का पूरा बनारस शर्मिंदा है
मेरा बनारस विकास कर रहा है

मां गंगा यह अपमान न सह पाएंगी
हम सब से जब वह रूठ जाएंगे
अपना बनारस वह छोड़ चली जाएंगी
ना बाबा विश्वनाथ रहेंगे ना बाबा के भक्त
ना बनारसी रहेंगे ना बनारस की शान
ना बनारसी भाषा होगी ना बनारस की मान
आओ हम सब मिलकर कसम खाएं
अपने बनारस को फिर से आस्था की दुल्हन बनाएं

     रचनाकार - मदन मौर्या

रिपोर्ट:-

मनीष कुमार मौर्य

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